कन्हाईबंद में कोल डिपो के विरोध के पीछे ‘निहित स्वार्थ’? विकास को बाधित करने की कोशिश, संचालक ने दी सफाई

जांजगीर-चाम्पा: जिले के नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम कन्हाईबंद में प्रस्तावित कोल डिपो को लेकर एक नया विवाद सामने आ रहा है। जहाँ एक ओर संचालक शशांक कुमार सिंह (मेसर्स टर्टल सर्विसेस) सभी नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ तत्वों द्वारा इसे “अवैध” बताकर विकास कार्यों में अड़ंगा डालने की कोशिश की जा रही है।
नियमों के दायरे में हो रहा है काम: संचालक
कोल डिपो के संचालक शशांक कुमार सिंह और नीरज सिंह का कहना है कि खसरा नंबर 660 (रकबा 0.717 हेक्टेयर) पर कोल भंडारण के लिए प्रशासन के पास अस्थाई अनुज्ञा पत्र और आवश्यक अनुमति के लिए विधिवत आवेदन किया गया है। उनके अनुसार:
- शासकीय प्रक्रिया: खनिज विभाग और राजस्व विभाग को सभी दस्तावेज सौंप दिए गए हैं। विभाग द्वारा गहन निरीक्षण और जांच के बाद ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
- न्यायालय का सम्मान: मामला न्यायालय में लंबित होने की बात कहकर काम रोकने की कोशिश की जा रही है, जबकि संचालक का कहना है कि वे कानून का पूरा सम्मान करते हैं और किसी भी अवैध निर्माण में संलिप्त नहीं हैं।
भ्रामक प्रचार का खंडन
ग्राम के कुछ विशेष मांगो वाले लोगो द्वारा लगाए गए आरोपों पर पक्ष रखते हुए संचालक मंडल ने स्पष्ट किया कि: - भूमि खरीदी में पारदर्शिता: जमीन की खरीदी पूरी तरह वैध है। कोटवारी या शासकीय भूमि पर कब्जे का आरोप निराधार है। रजिस्ट्री और राजस्व रिकॉर्ड में सभी तथ्य स्पष्ट हैं।
- शपथ पत्र पर सफाई: जिला प्रशासन को दिए गए शपथ पत्र में किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं छिपाई गई है। डायवर्जन की प्रक्रिया भी नियमों के तहत अपनाई जा रही है।
- खनिज विभाग की अनुमति: खनिज विभाग एक सरकारी संस्था है जो बिना भौतिक सत्यापन और नियमों की पूर्ति के अनुमति नहीं देती। विभाग पर ‘लेनदेन’ के आरोप लगाना उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने जैसा है, जो केवल काम रोकने की एक रणनीति है।
रोजगार और क्षेत्र का विकास
संचालक का तर्क है कि नए उद्योग या डिपो खुलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। कुछ लोग व्यक्तिगत रंजिश या निहित स्वार्थों के चलते ग्रामीणों को गुमराह कर रहे हैं। प्रदूषण के दावों पर कहा गया है कि डिपो संचालन के दौरान आधुनिक तकनीकों और पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों का पूरा पालन किया जाएगा ताकि किसी की दैनिक व्यवस्था या तालाब प्रदूषित न हो।
राजनीतिक संरक्षण के आरोपों पर जवाब
स्थानीय नेताओं के सहयोग के आरोपों पर संचालक ने कहा कि किसी भी उद्यमी को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए जनप्रतिनिधियों से मिलना स्वाभाविक है, इसका अर्थ “राजनीतिक धौंस” नहीं है। यह केवल क्षेत्र में निवेश लाने का एक प्रयास है।
निष्कर्ष: कोल डिपो संचालक का कहना है कि वे प्रशासन की हर जांच के लिए तैयार हैं और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्हें विश्वास है कि जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और विकास विरोधी ताकतों की हार होगी।
ब्यूरो रिपोर्ट: के भारत न्यूज़




