जांजगीर-चांपा जिले के जांजगीर शहर में इन दिनों सियासी गलियारों से ज्यादा हलचल मीडिया जगत में है। जांजगीर जिला प्रेस क्लब के आगामी चुनाव ने पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। यह सिर्फ पत्रकारों का चुनाव नहीं, बल्कि शहर की साख और निष्पक्षता की कसौटी बन गया है।

महाजंग:

जांजगीर प्रेस क्लब चुनाव पर टिकी शहर की निगाहें, क्या निष्पक्षता जीतेगी या गुटबाजी?

जांजगीर: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया जगत में ‘सत्ता’ के संग्राम ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। जांजगीर जिला प्रेस क्लब के चुनाव के नतीजों का इंतजार केवल पत्रकारों को ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष, विपक्ष और समाजसेवियों को भी बेसब्री से है। हर कोई यह देखना चाहता है कि शहर की आवाज उठाने वालों का नेतृत्व किसके हाथों में होगा।

विवादों के घेरे में ‘मतदाता सूची’: बवाल की आशंका

चुनाव से पहले ही शहर के चौक-चौराहों पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों की मानें तो मतदाता सूची को लेकर एक बड़ा बवंडर खड़ा हो सकता है। आरोप लग रहे हैं कि कुछ वर्तमान पदाधिकारियों ने पद के मोह में ‘अपनों’ को फायदा पहुँचाने के लिए अपात्र लोगों को सदस्य बना दिया है।

चर्चा का विषय: क्या कलम के सिपाहियों की इस संस्था में ‘भाई-भतीजावाद’ हावी हो रहा है?

आशंका: अपात्र सदस्यों के नाम शामिल होने से असली और निष्ठावान पत्रकारों में भारी आक्रोश है, जो किसी भी वक्त बड़े बवाल का रूप ले सकता है।

8 मार्च: फैसले की घड़ी!

कल, यानी 8 मार्च को दोपहर 4:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया है। माना जा रहा है कि यह बैठक चुनाव की दशा और दिशा तय करेगी। क्या इस बैठक में पारदर्शिता बरती जाएगी या विवाद और गहराएगा? इस पर पूरे शहर की टकटकी लगी हुई है।

पत्रकारिता समाज का दर्पण

पत्रकारिता समाज का दर्पण होती है। जब दर्पण ही धुंधला हो जाए, तो समाज को सही तस्वीर नहीं दिखती। प्रेस क्लब का चुनाव केवल एक पद का चुनाव नहीं है, बल्कि यह ईमानदारी बनाम अवसरवाद की लड़ाई है। समाज को उम्मीद है कि इस चुनाव से ऐसे प्रतिनिधि चुनकर आएंगे जो व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर जनहित और पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा करेंगे।

सियासी तड़का

शहर के बड़े राजनेता भी पर्दे के पीछे से अपनी गोटियां फिट करने में लगे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि प्रेस क्लब का अध्यक्ष उनके पक्ष या विपक्ष में जनमत तैयार करने की ताकत रखता है।

क्या जांजगीर के पत्रकार इस ‘अग्निपरीक्षा’ में सफल होंगे? क्या मतदाता सूची का विवाद सुलझेगा? जवाब कल की बैठक के बाद ही मिल पाएगा।

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