सस्पेंशन खत्म होते ही अभिषेक प्रकाश को मिली अहम पोस्टिंग, यूपी सरकार ने सौंपी नई जिम्मेदारी

लखनऊ
रिश्वत मामले में सस्पेंड किए गए आईएएस अभिषेक प्रकाश की प्रशासनिक सेवा में एक बार फिर वापसी हो गई है। एक साल पहले निलंबित किए गए आईएएस अभिषेक को यूपी सरकार ने नई जिम्मेदारी सौंपी है। आईएएस अभिषेक को सचिव सामान्य प्रशासन में तैनाती मिली है। इसको लेकर शासन की ओर से आदेश भी जारी कर दिया है। आईएएस के निलंबन खत्म होने के बाद सेवा में उनकी वापसी एक अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि अभी उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया गया है। इसको लेकर लोगों की निगाहें टिकी हैं।
एक साल पहले मार्च में सस्पेंड किए गए आईएएस अभिषेक प्रकाश के 15 मार्च को यूपी सरकार ने बहाली के आदेश जारी कर दिए हैं। नियुक्ति अनुभाग-5 द्वारा जारी आदेश में कहा गया था कि आईएएस अभिषेक प्रकाश की निलंबन अवधि 14 मार्च तक मानी जाएगी। इसके बाद 15 मार्च से उन्हें सेवा में बहाल करने का निर्णय लिया गया है। शासन ने यह आदेश राज्यपाल की अनुमति से जारी किया था। साथ ही आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बहाली के बावजूद उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई यथावत जारी रहेगी।
सस्पेंड होने से पहले सीईओ के पद पर तैनात थे आईएस अभिषेक
अभिषेक प्रकाश इससे पहले इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर तैनात थे। उन पर एक सोलर कंपनी से प्रोजेक्ट मंजूरी के बदले रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में प्रदेश सरकार ने 20 मार्च 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया था। हालांकि, बाद में मामले की सुनवाई के दौरान पिछली फरवरी में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने साक्ष्यों के अभाव में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को रद्द कर दिया था। इसके बाद से उनके निलंबन की समीक्षा की जा रही थी।
लागत का पांच प्रतिशत घूस मांगने लगा था आरोप
इंवेस्ट यूपी के सीईओ रहने के दौरान सोलर एनर्जी प्रदेश में संयंत्र लगाने के एवज में कुल लागत का पांच प्रतिशत घूस मांगने का भी आरोप लगा था। सोलर कंपनी ने इन्वेस्ट यूपी के कार्यालय के साथ ऑनलाइन प्रार्थना पत्र भेजा था। कंपनी के प्रस्ताव को एम्पावर्ड कमेटी और कैबिनेट से तुरंत मंजूर कराने के एवज में घूस देने की मांग की गई थी। कंपनी के लोगों ने मुख्यमंत्री से इसकी शिकायत की थी। मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह द्वारा जांच के बाद उन्हें निलंबित किया गया था। अभिषेक प्रकाश को डिफेंस कॉरिडोर भूमि घोटाले के आरोप में पहले ही चार्जशीट मिली थी। घूसखोरी के आरोप पर दी गई चार्जशीट पर लगे आरोपों के आधार पर बिंदुवार स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था। बताया जा रहा है कि चार्जशीट पर सोलर एनर्जी कंपनी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का जिक्र किया गया था।




