छत्तीसगढ़

ज्ञान भारतम् अभियान: एमसीबी जिले में पांडुलिपि सर्वे शुरू, 1850 की दुर्लभ हस्तलिखित धरोहर का डिजिटलीकरण

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी

ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में प्राचीन पांडुलिपियों (हस्तलिखित ग्रंथों) के संरक्षण हेतु व्यापक सर्वे अभियान प्रारंभ कर दिया गया है। इस पहल के तहत तीन मास्टर ट्रेनर एवं 137 सर्वेक्षकों की नियुक्ति कर सभी ग्राम पंचायतों में सर्वे कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने जिला स्तरीय समिति का गठन करते हुए सभी सर्वेक्षकों की ऑनलाइन बैठक ली। उन्होंने अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सर्वे के दौरान कम से कम 60–70 वर्ष या उससे अधिक प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों की पहचान की जाएगी। ऐसे ग्रंथ पुस्तकालयों, मंदिरों एवं निजी संग्रहों में विशेष रूप से मिल सकते हैं, खासकर उन परिवारों में जहां पीढ़ियों से पुरानी धरोहरें सुरक्षित रखी गई हैं।
इसी क्रम में चिरमिरी निवासी व्याख्याता प्रदीप कुमार बेहरा के निवास पर विशेष पहल की गई। यहां ज्ञान भारतम् अभियान के जिला नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडेय, चिरमिरी नगर निगम के महापौर रामनरेश राय एवं रितेश श्रीवास्तव की उपस्थिति में लगभग वर्ष 1850 की उड़िया भाषा की 6 दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया गया।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने श्री बेहरा के द्वारा संरक्षित इस अमूल्य विरासत की सराहना की। महापौर ने आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने पास उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों की जानकारी देकर इस अभियान में सक्रिय सहयोग करें। वहीं कलेक्टर ने भी पांडुलिपि संरक्षण के लिए श्री बेहरा को बधाई देते हुए इसे सांस्कृतिक धरोहर बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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