कुपोषित बच्चों पर सिस्टम का ताला! डभरा का पोषण पुनर्वास केंद्र महीनों से बंद, लाखों का वाटर फिल्टर खा रहा धूल

फरवरी से लटका है एनआरसी पर ताला, पूर्व बीएमओ की मेहनत पर फिरा पानी; जिम्मेदारों की चुप्पी से उठे गंभीर सवाल
चंद्रपुर:— कुपोषण के खिलाफ शासन की महत्वाकांक्षी योजना डभरा में खुद बदहाली का शिकार हो गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डभरा परिसर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) पिछले कई महीनों से बंद पड़ा है। जिस केंद्र में गंभीर कुपोषित बच्चों को जीवन देने की व्यवस्था होनी चाहिए थी, वहां आज मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ है। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, इस एनआरसी की शुरुआत तत्कालीन बीएमओ डॉ. राजेंद्र पटेल के अथक प्रयासों से हुई थी, ताकि डभरा और चंद्रपुर के आसपास के क्षेत्रों के गंभीर कुपोषित बच्चों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार और पोषण मिल सके। लेकिन अब फरवरी माह से केंद्र बंद होने की बात सामने आ रही है। सवाल यह है कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं कि बच्चों के लिए बनाई गई यह महत्वपूर्ण सुविधा ही ठप हो गई और जिम्मेदार अधिकारी तमाशबीन बने रहे।
लाखों का वाटर फिल्टर बना सरकारी लापरवाही की मिसाल
स्थिति केवल केंद्र बंद होने तक सीमित नहीं है। परिसर में लाखों रुपये की लागत से लगाया गया स्टेनलेस स्टील का वाटर फिल्टर भी बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। धूल, गंदगी और जंग की मार झेल रहा यह फिल्टर अब उपयोग के बजाय सरकारी संसाधनों की बर्बादी का प्रतीक बन चुका है। उसकी बाहरी परत उखड़ चुकी है और लंबे समय से उपयोग नहीं होने के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। सवाल यह भी है कि जनता के टैक्स के पैसे से खरीदे गए उपकरणों की सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
कुपोषित बच्चों का इलाज कहां? जवाबदेही तय करने की उठी मांग
सबसे बड़ा सवाल उन मासूम बच्चों को लेकर है, जिन्हें कुपोषण से उबारने के लिए यह केंद्र बनाया गया था। यदि एनआरसी महीनों से बंद है तो गंभीर कुपोषित बच्चों को कहां भर्ती किया जा रहा है? क्या उन्हें दूसरे केंद्रों में भेजा जा रहा है या फिर वे इस सुविधा से पूरी तरह वंचित हो गए हैं? यदि ऐसा है तो इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?
स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा पोषण पुनर्वास केंद्र को तत्काल पुनः शुरू करने की मांग की है। साथ ही अनुपयोगी पड़े वाटर फिल्टर की मरम्मत या आवश्यक होने पर प्रतिस्थापन कर उसे जनहित में उपयोग में लाने की भी मांग की गई है।
वर्जन…..
एनआरसी महिला एवं बाल विकास विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सहयोग से संचालित होता है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चिन्हांकित गंभीर कुपोषित बच्चों का यहां उपचार किया जाता। एनआरसी बंद नहीं है कुपोषित बच्चे अभी नहीं आ रहे है इसलिए बंद रहता है। वहीं परिसर में लगे वाटर फिल्टर के संबंध में जानकारी लेकर उसकी मरम्मत अथवा आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी।
बिनेस नायक बीएमओ डभरा









