केंद्रीय संस्थानों के कॉन्क्लेव में शोध, नवाचार, कौशल, उद्योग और मानव पूंजी को विकास का आधार बनाने पर मंथन

भोपाल
‘समृद्ध मध्यप्रदेश @ 2047: केंद्रीय संस्थानों की भूमिका’ विषय पर कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश के दीर्घकालीन विकास के लिए केंद्रीय एवं शैक्षणिक संस्थानों, राज्य सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित करने पर जोर दिया गया। कॉन्क्लेव में संस्थानों ने राज्य की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप शोध, कौशल विकास, तकनीकी नवाचार, कृषि, उद्योग, पर्यटन, स्वास्थ्य, शहरी नियोजन और डिजिटल गवर्नेंस में सहयोग की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम के स्वागत भाषण में अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (AIGGPA) के उपाध्यक्ष प्रो राजीव दीक्षित ने कॉन्क्लेव की रूपरेखा और इसके प्रमुख उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ‘समृद्ध मध्यप्रदेश @ 2047’ के विज़न को सात प्रमुख श्रेणियों—कृषि एवं ग्रामीण विकास, ऊर्जा, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, रक्षा एवं सुरक्षा तथा प्रबंधन, शिक्षा, कौशल, डिजाइन, पर्यटन एवं खेल—में विभाजित किया गया है। उन्होंने कहा कि कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रत्येक केंद्रीय संस्थान को एक स्पष्ट ‘एक संस्थान–एक संकल्प’ के साथ जोड़ना है, ताकि संस्थान अपनी विशेषज्ञता के अनुरूप ठोस योगदान दें और 2047 के विकास लक्ष्य को साकार करने में भागीदार बनें।
दूसरे सत्र में कॉन्क्लेव में विभिन्न केंद्रीय संस्थानों ने अपने सहयोग की ठोस संभावनाएँ प्रस्तुत कीं। आईआईटी इंदौर ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराने तथा आगामी 4-5 वर्षों में 10,000 युवाओं को विशेषीकृत क्षेत्रों में प्रशिक्षित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। आईआईएसईआर भोपाल ने ड्रोन टेक्नोलॉजी, खनन और कृषि अनुसंधान में सहयोग की जानकारी दी। आईआईएम इंदौर ने कृषि सुधार, पर्यटन और पंचायती राज के डिजिटलीकरण में सहयोग का प्रस्ताव रखा।
एनआईटीटीटीआर भोपाल ने सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग के लिए स्थापित क्लीन-रूम लैब और शिक्षक प्रशिक्षण के प्रयासों की जानकारी दी। आईआईआईटी भोपाल ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञता उपलब्ध कराने की बात कही। मेनिट भोपाल ने ऊर्जा संक्रमण, कौशल एवं उच्च शिक्षा में चल रही पहलों की जानकारी दी। एलएनआईपीईयू ग्वालियर ने खेल, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता को जोड़ने तथा जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई। सीएसआईआर-एएमपीआरआई भोपाल ने कौशल विकास, महत्वपूर्ण खनिजों, पर्यावरणीय तकनीक और स्मार्ट विलेज पहल का उल्लेख किया। एसपीए भोपाल ने शहरी नियोजन, आवास, परिवहन, पर्यावरण और विरासत संरक्षण में सहयोग की जानकारी दी, जबकि एनआईडी मध्यप्रदेश ने राज्य के लिए मानव-केंद्रित ‘डिज़ाइन इंजन’ की भूमिका निभाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
सत्र में ‘2047 तक समृद्ध मध्यप्रदेश के लिए समावेशी आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तिकरण’ विषय पर चर्चा हुई। सतत औद्योगिक गतिवर्धन, बहु-उत्पाद औद्योगिक क्लस्टर, उद्योग-अकादमिक समन्वय, कौशल विकास केंद्र, आर&डी इकोसिस्टम और उत्कृष्टता केंद्रों को प्रमुख आर्थिक प्राथमिकताओं के रूप में चिन्हित किया गया। कृषि क्षेत्र में प्रिसीजन फार्मिंग, कृषि निर्यात पार्क, कोल्ड-चेन, एग्रीटेक, बायोटेक और ग्रीनटेक पर बल दिया गया। सेवा क्षेत्र में पर्यटन, आईटी, एवीजीसी और डेटा सेंटर इकोसिस्टम के विस्तार की संभावनाएँ रेखांकित की गईं।
सामाजिक क्षेत्र में विश्वस्तरीय शिक्षा एवं कौशल, एआई-संचालित मूल्यांकन, स्थानीय एवं जनजातीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री, अनुसंधान केंद्र, बौद्धिक संपदा को बढ़ावा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ, टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ, नवीकरणीय ऊर्जा, ईवी चार्जिंग तथा सतत शहरी एवं ग्रामीण अवसंरचना को प्राथमिकता दी गई।
कॉन्क्लेव में नीतिगत समन्वय, डिजिटल नॉलेज रिपॉजिटरी एवं विशेषज्ञ डेटाबेस तथा केंद्रीय संस्थानों और राज्य सरकार के विभागों के बीच निरंतर सहयोग विकसित करने पर सहमति बनी। प्रतिभागियों ने विज़न को मिशन, परियोजनाओं, रणनीतियों और मापनीय परिणामों में बदलने तथा ‘एक संस्थान–एक संकल्प’ को ठोस कार्ययोजनाओं से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में संस्थान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विभाष कुमार ठाकुर, संचालक श्री स्वरोचिष सोमवंशी, प्रो संतोष विश्वकर्मा चीफ साइंटिफिक एडवाइजर के साथ संस्थान के समस्त अधिकारी उपस्थित रहे।




