शिक्षक पर झूठे आरोप लगाकर ‘शिक्षा के मंदिर’ को बदनाम करने की कोशिश चंद्रपुर के ग्राम मिरौनी स्कूल का मामला गरमाया: ग्रामीणों ने शिकायत को बताया फर्जी और तथ्यहीन, बोले—बैठक के नाम पर हस्ताक्षर कराकर शिक्षक की छवि धूमिल करने का आरोप

चंद्रपुर :— चंद्रपुर तहसील एवं डभरा विकासखंड के नवीन शासकीय प्राथमिक शाला मिरौनी पारा में शिक्षक कैलाश पटेल के खिलाफ 17 सितंबर 2026 को की गई शिकायत अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। ग्राम मिरौनी के ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को आवेदन देकर शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोपों को झूठा, गलत और तथ्यहीन बताया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें स्कूल की बैठक के नाम पर बुलाकर हस्ताक्षर कराए गए और बाद में उन्हीं हस्ताक्षरों के आधार पर शिक्षक के खिलाफ शिकायत प्रस्तुत कर दी गई।
ग्रामीणों के इस आवेदन ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। एक तरफ शिक्षक पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर गांव के लोगों ने सामने आकर उन आरोपों को ही गलत बताया है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शिकायत में लगाए गए आरोपों का आधार क्या है और ग्रामीणों के हस्ताक्षर किस परिस्थिति में लिए गए?

गंभीर आरोपों से शिक्षक की सामाजिक प्रतिष्ठा पर चोट

ग्रामीणों के अनुसार शिकायत में शासकीय प्राथमिक शाला मिरौनी पारा के शिक्षक एक महिला के बीच गलत संबंध होने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने इन आरोपों को सिरे से गलत बताया है।
किसी शिक्षक पर इस तरह का गंभीर आरोप लगना केवल एक व्यक्ति की प्रतिष्ठा का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर विद्यालय की छवि और वहां के शैक्षणिक वातावरण पर भी पड़ सकता है। यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो बिना तथ्य किसी शिक्षक को कटघरे में खड़ा करना बेहद गंभीर विषय बन जाता है।

‘स्कूल की बैठक’ के नाम पर हस्ताक्षर, फिर शिकायत में इस्तेमाल

ग्रामीणों ने अपने आवेदन में दावा किया है कि वे रोजी-मजदूरी करने वाले सामान्य ग्रामीण हैं और सभी लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं। उनका आरोप है कि चंद्राबाई (रसोईया) एवं रेशम साहू द्वारा स्कूल की बैठक होने की बात कहकर उनसे हस्ताक्षर करवाए गए। इसके बाद 17 सितंबर को जिला कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी सक्ती और मीडिया में शिकायत प्रस्तुत की गई। ग्रामीणों के इस आरोप की भी प्रशासनिक जांच की जरूरत है कि वास्तव में हस्ताक्षर किस उद्देश्य से लिए गए थे और हस्ताक्षर करने वाले ग्रामीणों को शिकायत की पूरी जानकारी थी या नहीं।

शिकायत में छात्रा की कक्षा को लेकर भी उठे सवाल

ग्रामीणों ने शिकायत में कक्षा 5वीं में पढ़ने के उल्लेख को भी गलत बताया है। ग्रामीणों के आवेदन के अनुसार छात्रा वर्तमान में कक्षा 8वीं की छात्रा है। यही तथ्य अब शिकायत की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब शिकायत में छात्रा की कक्षा को लेकर ही गलत जानकारी दी गई है तो लगाए गए अन्य गंभीर आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।

शिक्षा के मंदिर को विवादों का अखाड़ा बनाने पर सवाल

विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण का स्थान है। यहां शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच विश्वास एवं अनुशासन का वातावरण होना आवश्यक है। ऐसे में शिक्षक पर गंभीर आरोप लगाकर विद्यालय को विवादों में घसीटने की घटना ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी शिक्षक के खिलाफ वास्तविक शिकायत है तो उसके लिए जांच की विधिवत प्रक्रिया मौजूद है। प्रमाण सामने रखे जाएं, जांच कराई जाए और दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई हो। लेकिन यदि आरोप ही गलत पाए जाते हैं तो किसी शिक्षक की प्रतिष्ठा से खिलवाड़ करने की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

अब जांच से सामने आएगा सच

ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि 17 सितंबर 2026 को दी गई शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाए। शिकायत में लगाए गए प्रत्येक आरोप की वास्तविकता जांची जाए, ग्रामीणों के बयान लिए जाएं तथा यह भी जांचा जाए कि उनके हस्ताक्षर किन परिस्थितियों में लिए गए थे।
ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि शिकायत जांच में झूठी या तथ्यहीन पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही शिक्षक कैलाश पटेल की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाले आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
फिलहाल उपलब्ध आवेदन के आधार पर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में प्रशासनिक जांच ही यह तय करेगी कि शिक्षक पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और शिकायत में ग्रामीणों के हस्ताक्षरों का वास्तविक इस्तेमाल किस परिस्थिति में हुआ।

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