नैला में दिखेगी न्यू जर्सी के अक्षरधाम मंदिर की भव्यता: 35 फीट की प्रतिमा को सजाएंगे असली हीरे-मोती, 150 फीट ऊंचा बन रहा पंडाल

जांजगीर-चांपा:
शारदीय नवरात्रि को लेकर जांजगीर-चांपा जिले में तैयारियां जोरों पर हैं। देवी मंदिरों में जहां ज्योति कलश प्रज्वलित करने की तैयारी पूरी हो चुकी है, वहीं नैला रेलवे स्टेशन के पास सजने वाला ऐतिहासिक दुर्गा पंडाल अपने 43वें वर्ष में और भी भव्य रूप लेने जा रहा है। पिछले दो महीनों से कोलकाता, भटगांव और रायगढ़ के कारीगर दिन-रात एक कर इस दरबार को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। आयोजन समिति ने प्रेसवार्ता कर इस वर्ष की तैयारियों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की विस्तृत जानकारी साझा की है।
अमेरिका के अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर 150 फीट ऊंचा पंडाल
इस वर्ष नैला का पंडाल अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर के स्वरूप में तैयार किया जा रहा है।

आकार व संरचना: पंडाल की ऊंचाई 150 फीट और चौड़ाई 200 फीट रखी गई है। इसे कोलकाता के कुशल कारीगर बांस, सफेद कपड़े और थर्मोकोल की बारीक नक्काशी से तैयार कर रहे हैं।
* स्वर्ण आभा: पंडाल के भीतरी हिस्से को रायगढ़ के कलाकारों द्वारा गोल्डन और सिल्वर फिनिशिंग दी जा रही है, जिससे अंदर प्रवेश करते ही पूरा दरबार सोने-चांदी के महल जैसा नजर आएगा।
35 फीट ऊंची प्रतिमा, असली हीरे-जवाहरात से होगा श्रृंगार
नैला दुर्गा उत्सव की सबसे बड़ी पहचान मां दुर्गा की विशाल और जीवंत प्रतिमा होती है।

भटगांव के 20 मूर्तिकार सक्रिय: भटगांव से आए 20 मूर्तिकार बीते दो माह से बांस के मजबूत ढांचे पर मिट्टी का लेप चढ़ाकर मां दुर्गा की 35 फीट ऊंची मनमोहक प्रतिमा गढ़ रहे हैं।
* शाही श्रृंगार: माता रानी का श्रृंगार असली हीरे, मोती, सोने व चांदी के बहुमूल्य आभूषणों के साथ-साथ उत्कृष्ट आर्टिफिशियल ज्वेलरी से किया जाएगा।
आकर्षण का केंद्र: 8 प्रोजेक्टरों पर दिखेगा जिले का पर्यटन
इस बार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए तकनीक और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। जिले के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों को लाइट एंड साउंड शो के जरिए 8 बड़े प्रोजेक्टरों पर प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालु जिले की सांस्कृतिक धरोहर से भी रूबरू हो सकें।
समिति की अनूठी परंपरा: कोई अध्यक्ष नहीं, हर सदस्य जिम्मेदार
नैला दुर्गा उत्सव समिति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां किसी व्यक्ति विशेष को पद या अध्यक्ष नहीं बनाया जाता। समिति का प्रत्येक सदस्य पूरी निष्ठा और बराबरी की जिम्मेदारी के साथ व्यवस्था संभालता है।

> “मूर्ति और पंडाल की कोई तय लागत नहीं आंकी गई है; मुख्य उद्देश्य आस्था का सम्मान और काम करने वाले कलाकारों व श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराना है।”

> — आयोजन समिति सदस्य

>
43 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के चलते नवरात्रि के नौ दिनों में पूरा नैला-जांजगीर भक्तिमय माहौल में डूबा रहता है। छत्तीसगढ़ के कोने-कोने के अलावा पड़ोसी राज्यों जैसे ओडिशा, मध्य प्रदेश और झारखंड से भी लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button