बस्तर दशहरा में अनूठी परंपरा, बेल फल देकर देवी को आमंत्रण

जगदलपुर.
बस्तर दशहरा की धार्मिक परंपराओं में शामिल बेल पूजा अब अपने खास पड़ाव पर पहुंच गई है. सरगीपाल गांव में इस अनूठे अनुष्ठान को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. शनिवार देर रात मां दंतेश्वरी मंदिर के प्रधान पुजारी और मांझी-मुखिया गांव पहुंचकर पूजा की रस्म निभाएंगे.
प्राचीन बेल वृक्ष पर जोड़े में लगे फलों को लाल वस्त्र से बांधकर देवी को विधिवत आमंत्रण दिया जाएगा. लोकमान्यता के अनुसार, युग्म बेल को भगवान शिव और माता पार्वती का प्रतीक माना जाता है. रविवार सुबह 11 बजे राजपरिवार, राजगुरु, पुजारी और ग्रामीणों की मौजूदगी में विशेष पूजा-अर्चना होगी. इसके बाद परंपरागत विधि से बेल के दोनों फलों को वृक्ष से उतारा जाएगा. इस दौरान सरगीपाल में पारंपरिक गीत-संगीत और गाजे-बाजे के साथ उत्सव का माहौल रहेगा. ग्रामीण इस आयोजन को अपनी पुत्री के विवाह जैसे मांगलिक संस्कार के रूप में मनाते हैं.
हल्दी लगाने और हल्दी-पानी छिड़कने की रस्म के बीच गांव में विवाह जैसा उल्लास दिखाई देगा. पूजा के बाद शोभायात्रा के साथ युग्म बेल को मां दंतेश्वरी मंदिर लाया जाएगा, जहां विधिवत स्थापना होगी. बेल पूजा की यह परंपरा बस्तर दशहरा की सांस्कृतिक विरासत, लोकआस्था और जनजातीय परंपराओं की विशिष्ट पहचान है.




