छत्तीसगढ़

जांजगीर का अपमान: हृदय स्थल पर शहीद स्मारक जर्जर, नगर पालिका की उदासीनता पर तीखे सवाल

जांजगीर, 10/06/2025: जांजगीर शहर के हृदय स्थल पर स्थित शहीद स्मारक, जो हमारे देश के वीर सपूतों के बलिदान का प्रतीक है, आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। नगर पालिका जांजगीर की घोर लापरवाही और उदासीनता के चलते यह गौरवशाली स्मारक जर्जर हालत में पहुंच गया है। इसकी दीवारें बांस और बल्लियों के सहारे खड़ी हैं, जो किसी भी समय बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं। यह नजारा नगर पालिका के खोखले दावों और प्राथमिकताओं पर तीखे सवाल खड़े करता है।
शहीद स्मारक, जहां हर वर्ष राष्ट्रीय पर्वों पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए जाते हैं और जहां शहरवासी अपने शहीदों को नमन करने आते हैं, उसकी यह जर्जर स्थिति पालिका प्रशासन की संवेदनहीनता का जीता-जागता प्रमाण है। क्या नगर पालिका के पास दुनिया भर के दिखावटी कामों के लिए फंड है, लेकिन उन शहीदों के स्मारक की मरम्मत के लिए पैसे नहीं हैं, जिनकी बदौलत आज हम आजाद हवा में सांस ले रहे हैं?
यह विडंबना ही है कि जहां एक ओर नगर पालिका नए-नए प्रोजेक्ट्स और सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी ओर शहर की धरोहर और पहचान बन चुके शहीद स्मारक की सुध लेने वाला कोई नहीं। बांस और बल्लियों का सहारा लेकर खड़ा यह स्मारक न केवल सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक है, बल्कि यह हमारे शहीदों के प्रति हमारी कृतघ्नता का भी प्रतीक बन गया है।
शहरवासी इस स्थिति से बेहद आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि नगर पालिका जांजगीर को तत्काल इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। शहीद स्मारक की मरम्मत और जीर्णोद्धार प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए, ताकि हमारे शहीदों को उचित सम्मान मिल सके और यह ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित रह सके। अन्यथा, यह न केवल नगर पालिका की अक्षमता को उजागर करेगा, बल्कि हमारे वीर सपूतों के बलिदान का भी अपमान होगा।
नगर पालिका जांजगीर को यह समझना होगा कि विकास केवल चमचमाती सड़कें और इमारतें नहीं होतीं, बल्कि इसमें इतिहास, संस्कृति और उन बलिदानों का सम्मान भी शामिल होता है, जिनकी नींव पर हमारा वर्तमान खड़ा है। शहीद स्मारक की यह दुर्दशा नगर पालिका के मुंह पर एक करारा तमाचा है और यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर उनकी प्राथमिकताएं क्या हैं? क्या वे वास्तव में जांजगीर के गौरव को अक्षुण्ण रखना चाहते हैं या केवल अपनी जेबें भरना? इसका जवाब उन्हें जांजगीर की जनता को देना होगा।

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