धर्मांतरण के विरुद्ध शंखनाद: 24 दिसंबर को ‘छत्तीसगढ़ बंद’ को सराफा एसोसिएशन का पूर्ण समर्थन, प्रदेशभर की 120 इकाइयां रहेंगी बंद

बिलासपुर/रायपुर। कांकेर जिले में मिशनरियों द्वारा स्थानीय जनजाति समाज के कथित धर्मांतरण के मामले ने अब पूरे प्रदेश में तूल पकड़ लिया है। छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन ने इस कृत्य की घोर निंदा करते हुए छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा आहूत 24 दिसंबर (बुधवार) के ‘छत्तीसगढ़ बंद’ को अपना ऐतिहासिक समर्थन देने का ऐलान किया है।
कमल सोनी की हुंकार: “सनातनी परंपरा पर प्रहार बर्दाश्त नहीं”
छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष और चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष कमल सोनी ने सचिव प्रकाश गोलछा के साथ संयुक्त पत्र जारी कर इस बंद की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“कांकेर में हमारी सनातनी जनजाति का जिस प्रकार धर्मांतरण कराया जा रहा है, वह समाज के ताने-बाने पर हमला है। प्रशासन तक अपनी आवाज पहुँचाने के लिए प्रदेश की सभी 120 सराफा इकाइयां अपने प्रतिष्ठान पूर्णतः बंद रखेंगी।”
बिलासपुर में निकलेगी विशाल ‘विरोध रैली’
बंद को प्रभावी बनाने के लिए केवल दुकानें ही बंद नहीं रहेंगी, बल्कि सड़कों पर उतरकर विरोध भी दर्ज कराया जाएगा:
- समय: सुबह 11:30 बजे (24 दिसंबर)
- मार्ग: सदर बाजार बिलासपुर से गोलबाजार तक।
- नेतृत्व: बिलासपुर सराफा एसोसिएशन और छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारी।
प्रदेशव्यापी असर: 120 इकाइयों को निर्देश जारी
एसोसिएशन ने अपने सभी सदस्यों से आह्वान किया है कि वे न केवल अपनी दुकानें बंद रखें, बल्कि अपने-अपने क्षेत्रों में सांकेतिक प्रदर्शन भी करें। इस बंद का उद्देश्य शासन-प्रशासन को यह कड़ा संदेश देना है कि राज्य के किसी भी कोने में हो रहे धर्मांतरण के विरुद्ध पूरा व्यापारिक समुदाय एकजुट है।
प्रमुख मांगें और उद्देश्य: - कांकेर में हो रहे धर्मांतरण के खेल पर तत्काल रोक लगे।
- स्थानीय जनजातीय संस्कृति और धर्म की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
- धर्मांतरण में संलिप्त शक्तियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
सोशल मीडिया के लिए ‘अपील’ छत्तीसगढ़ बंद!
धर्मांतरण के विरोध में 24 दिसंबर को छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन का पूर्ण समर्थन। अपनी संस्कृति और समाज की रक्षा के लिए सभी सराफा व्यापारी भाई अपने प्रतिष्ठान बंद रखें।
रैली: सदर बाजार से गोलबाजार, बिलासपुर।




