ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी महिमा डोली पॉल के आरोप निकले निराधार, हो सकती है बड़ी कार्यवाही,
जांजगीर-चांपा। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी महिमा डोली पॉल द्वारा उपसंचालक कृषि पर लगाए गए आरोपों की सच्चाई सामने आने लगी है। भारत न्यूज़ की जांच-पड़ताल में पाया गया है कि उनके द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार प्रतीत हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में ऐसे कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं जो अधिकारी महिमा डोली पॉल के आरोपों की पुष्टि करते हों। इसके विपरीत, कई ग्रामीणों और विभागीय सूत्रों ने भी बताया कि महिमा डोली पॉल के व्यवहार और कार्यशैली को लेकर पहले से ही कई शिकायतें दर्ज थीं।
जब भारत न्यूज़ की टीम ने उनका पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने पिछले 5 दिनों से फोन कॉल का जवाब नहीं दिया। इस चुप्पी से यह शक और गहराता जा रहा है कि उनके लगाए गए आरोप सिर्फ मनगढ़ंत और व्यक्तिगत रंजिश के तहत लगाए गए हो सकते हैं।
जानकारों का मानना है कि ऐसे झूठे और निराधार आरोप लगाना न केवल प्रशासनिक मर्यादा के खिलाफ है बल्कि कानूनी रूप से दंडनीय अपराध भी है। यदि जांच में आरोप असत्य सिद्ध होते हैं, तो अधिकारी महिमा डोली पॉल के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई और संभवतः बर्खास्तगी या जेल की सजा भी हो सकती है।
शासन से मांग की जा रही है कि इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी इस तरह के झूठे आरोप लगाकर विभाग की छवि खराब न करे।
अधिकारी का बयान उपसंचालक कृषि ललित मोहन भगत जांजगीर चांपा
महिमा डोली पॉल को मैं आज तक व्यक्तिगत कभी मिला नहीं ना आज तक कोई किसी प्रकार का तनख्वाह रोका हूं ना किसी प्रकार के व्यक्तिगत उससे द्वेष है, और वह जो आरोप प्रताड़ना का लगा रही है बिल्कुल निराधार है आप कहीं भी जांच करा लीजिए उसके मूल पद वापसी के लिए मैंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्राचार किया है क्योंकि पिछले 3 साल से वह मूल पद स्थापना स्थल पर नहीं है जिसके शिकायत पत्र वहां के सरपंच के द्वारा हमें प्राप्त हुआ था



