प्रेस क्लब जांजगीर में ‘भाई-भतीजावाद’ का बोलबाला: वरिष्ठ पत्रकारों को दरकिनार कर अपनों को बांटे नियुक्ति पत्र वेवस्था बिगड़ने का जिम्मेदार कौन ?

जांजगीर। पत्रकारों की प्रतिनिधि संस्था ‘प्रेस क्लब जांजगीर’ इस समय विवादों के घेरे में है। प्रेस क्लब की नवीन वोटर लिस्ट और नियुक्तियों को लेकर जिले के अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकारों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि संस्था के कुछ ‘मठाधीश अपनी कुर्सी सुरक्षित रखने के लिए प्रेस क्लब को हाईजैक करने की कोशिश कर रहे हैं।

वरिष्ठता ताक पर, ‘अपनों’ पर मेहरबानी

शहर के गलियारों में चर्चा है कि प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी और वोटर लिस्ट तैयार करने में पारदर्शिता को पूरी तरह हाशिए पर रख दिया गया है। वर्षों से क्षेत्र में पत्रकारिता की मशाल थामे हुए वरिष्ठ पत्रकारों को जानबूझकर दरकिनार किया गया है। वहीं दूसरी ओर, ऐसे लोगों को तीन-तीन साल के नियुक्ति पत्र थमा दिए गए हैं, जिनका पत्रकारिता के क्षेत्र में अनुभव न के बराबर है।

प्रेस क्लब पर ‘कब्जे’ की राजनीति

सूत्रों की मानें तो यह पूरी कवायद प्रेस क्लब पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए की गई है। भाई-भतीजावाद इस कदर हावी है कि संगठन के नियमों को ताक पर रखकर केवल चहेतों को ही सदस्य बनाया जा रहा है। “प्रेस क्लब किसी की निजी जागीर नहीं है, लेकिन कुछ लोग खुद को ‘मठाधीश’ साबित करने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या कर रहे हैं।” — नाराज पत्रकारों का स्वर

विवाद के मुख्य बिंदु: दोषपूर्ण वोटर लिस्ट:

पुराने और सक्रिय पत्रकारों के नाम गायब, नए चेहरों की फौज खड़ी की गई।

बैक डेट और मनमानी नियुक्ति:

बिना किसी योग्यता मापदंड के तीन साल के नियुक्ति पत्र जारी करना।

गुटबाजी को बढ़ावा:

संगठन को एकजुट करने के बजाय उसे चंद लोगों के फायदे के लिए इस्तेमाल करना।
इस मामले में अब जिले के पत्रकारों के बीच दो फाड़ की स्थिति निर्मित हो गई है। वरिष्ठ पत्रकारों ने इस ‘हाईजैकिंग’ के खिलाफ मोर्चा खोलने और उचित मंच पर अपनी आवाज उठाने की रणनीति तैयार कर ली है।

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