जांजगीर: जल संसाधन विभाग की ‘कुंभकर्णी नींद’, भू-माफिया कैनल को घेरकर कर रहे अवैध प्लाटिंग

जांजगीर-चांपा। जिले में भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे सरकारी कैनल (नहर) की जमीनों को भी निगलने में पीछे नहीं हट रहे हैं। जल संसाधन विभाग की नाक के नीचे कैनल की जमीन को घेरकर अवैध प्लाटिंग का खेल धड़ल्ले से जारी है। हैरत की बात यह है कि रसूखदारों द्वारा किए जा रहे इस कब्जे पर विभाग के अधिकारी आँखों पर पट्टी बांधे बैठे हैं, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लग रहे हैं।
नहर की जमीन पर कब्ज़ा: किसानों के हक पर डाका
सिंचाई के लिए बनाई गई कैनल आज भू-माफियाओं की ‘कमाई’ का जरिया बन गई है। जांजगीर और आसपास के क्षेत्रों में नहर किनारे की सरकारी जमीन पर कब्जा कर पक्के निर्माण कराए जा रहे हैं। नियमानुसार कैनल के किनारे एक निश्चित दूरी तक कोई भी निर्माण प्रतिबंधित है, लेकिन यहाँ प्लाटिंग और बाउंड्री वॉल खड़ी की जा रही है।

  • अवैध प्लाटिंग: सरकारी जमीन को निजी बताकर ऊँचे दामों पर बेचा जा रहा है।
  • अवरुद्ध बहाव: अवैध निर्माण के कारण नहरों के रखरखाव में दिक्कत आ रही है और भविष्य में सिंचाई के लिए पानी के बहाव में बाधा उत्पन्न होना तय है।
    विभाग की ‘मौन’ सहमति या लाचारी?
    शिकायतों के बाद भी जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का हरकत में न आना कई तरह के संदेह पैदा कर रहा है। आरोप है कि विभाग केवल ‘नोटिस’ की खानापूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है।
  • क्या अधिकारियों को इन अवैध निर्माणों की जानकारी नहीं है?
  • या फिर भू-माफियाओं के रसूख के आगे विभाग ने घुटने टेक दिए हैं?
  • विभागीय अमले की यह उदासीनता साफ दर्शाती है कि कहीं न कहीं अधिकारियों और भू-माफियाओं की सांठगांठ से सरकारी संपत्ति की बंदरबांट हो रही है।
    किसानों में आक्रोश: सिंचाई संकट का डर
    एक ओर शासन किसानों को पर्याप्त पानी देने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर कैनल की जमीन पर कब्ज़ा होने से नहरें संकरी होती जा रही हैं। यदि वक्त रहते इन कब्जों को नहीं हटाया गया, तो आने वाले समय में जिले की सिंचाई व्यवस्था चरमरा जाएगी।

चेतावनी: प्रशासन की यह सुस्ती किसी बड़ी घटना या विवाद को न्यौता दे रही है। यदि विभाग अपनी नींद से नहीं जागा, तो जांजगीर की जनता और किसान उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।

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