कोर्ट ने पीएम की मिमिक्री करने वाले शिक्षक के सस्पेंशन पर लगाई रोक, अधिकारियों को दी चेतावनी

शिवपुरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमक्री करने वाले वीडियो पर निलंबित किए मध्यप्रदेश के एक शासकीय शिक्षक को ग्वालियर हाई कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने शिक्षक के निलंबन पर रोक लगा दी है। साथ ही मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की है कि किसी अधिकारी द्वारा बिना सोचे-समझे या बाहरी दबाव में आकर इस तरह की कार्रवाई सिर्फ इसलिए नहीं की जानी चाहिए की वह उसके अधिकार क्षेत्र में है।
बीते 12 मार्च को शिवपुरी के पोहरी विकासखंड में पदस्थ शिक्षक साकेत पुरोहित द्वारा एलपीजी संकट के दौर में चल रहे हालात पर पीएम मोदी की मिमक्री करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया था इसके अगले ही दिन शिवपुरी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा उन्हें निलंबित कर दिया गया। निलंबन आदेश में तर्क दिया गया था कि, उनके इस कृत्य से विभाग की छवि धूमिल हुई है। शिक्षक साकेत पुरोहित ने इस निलंबन आदेश को ग्वालियर हाईकोर्ट में चैलेंज किया जिस पर गुरुवार को हाईकोर्ट ने फैसला देते हुए निलंबन पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ अधिकार में है इसलिए नहीं कर सकते सस्पेंड
साकेत पुरोहित की और से ग्वालियर हाईकोर्ट में पैरवी कर रहे वकील कृष्ण कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि, "साकेत पुरोहित के निलंबन पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि निलंबन कार्रवाई कोई अधिकारी किसी भी स्थिति में सिर्फ इसलिए नहीं कर सकता की उसके पास ऐसा करने का अधिकार है। हाईकोर्ट ने कहा है कि अधिकारी को निलंबन की कार्रवाई करने से पहले ये सोच विचार करना पड़ेगा कि क्या वाकई समबंधित विषय निलंबन का आधार है आपको देखना होगा की सस्पेंशन जरूरी भी है या नहीं। कोर्ट ने माना कि यह कार्रवाई जल्दबाजी और किसी दबाव में की गई है।
कोर्ट ने माना जल्दबाजी और बाहरी दबाव में की गई कार्रवाई
एडवोकेट शर्मा के मुताबिक साकेत पुरोहित के मामले में शिकायतकर्ता पिछोर विधायक प्रीतम लोधी थे जिनकी शिकायत पर यह निलंबन की कार्रवाई की गई। याचिकाकर्ता ने 12 मार्च को वीडियो अपलोड किया था और 13 मार्च को ही डीईओ द्वारा उन्हें निलंबन आदेश जारी कर दिया गया था। इस पर कोर्ट ने भी टिप्पणी कि है कि आप बाहरी दबाव में नहीं बल्कि सस्पेंड करने से पहले आपको तथ्य देखने होंगे। सिर्फ इसलिए कि एक विधायक ने शिकायत की और आपने अगले ही दिन कर्मचारी को निलंबित कर दिया। ये अधिकारी का स्वविवेक होना चाहिए।
विधायक ने शिक्षक को बताया कांग्रेसी मानसिकता वाला व्यक्ति
वकील कृष्ण कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि विधायक प्रीतम लोधी ने जो शिकायत की वह भी एक तरह से राजनीतिक एजेंडा आधारित थी। उन्होंने अपनी शिकायत में याचिकाकर्ता साकेत पुरोहित को कांग्रेसी मानसिकता वाला व्यक्ति बताया था। ये शिकायत भी कोर्ट दस्तावेजों में लगाई गई थी और ये बात हाईकोर्ट के संज्ञान में थी जिसका उल्लेख भी किया था।
सावधानी और तर्क के साथ होना चाहिए सस्पेंशन
वकील के मुताबिक याचिका पर फैसला देते हुए हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह दोहराया कि अधिकारियों के पास कर्मचारियों को सस्पेंड करने की शक्ति होती है, लेकिन इस शक्ति का इस्तेमाल पूरी सावधानी और तर्क के साथ किया जाना चाहिए बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि सस्पेंशन का सहारा आमतौर पर तभी लिया जाना चाहिए जब कोई गंभीर आरोप हों, जिनके लिए बड़ी सजा की जरूरत हो, या जब कर्मचारी की मौजूदगी से जांच प्रक्रिया में बाधा पड़ने की संभावना हो। कोर्ट ने कहा कि रूटीन या बिना सोचे-समझे किया गया सस्पेंशन स्वीकार्य नहीं।




