एमपी कांग्रेस में फिर से संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया, ओंकार और सिद्धार्थ समेत कई जिलाध्यक्षों की बारी

भोपाल
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी में है। पार्टी के भीतर 'शौक' के लिए पद पर काबिज नेताओं और निष्क्रिय पदाधिकारियों के खिलाफ अब सख्त रुख अपनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के 71 जिला अध्यक्षों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो चुका है, संगठन सृजन अभियान की लंबी प्रक्रिया के बाद एमपी में बनाए गए कांग्रेस के जिलाध्यक्षों में कई दिग्गज उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की ओर से एमपी भेजे गए वामसी रेड्डी की समीक्षा में करीब 12 जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट चिंताजनक पाई गई है।
अब एआईसीसी यानी राष्ट्रीय नेतृत्व को जिलाध्यक्षों की रिव्यू रिपोर्ट भेजी जाएगी। दिल्ली की हरी झंडी मिलने के बाद पुअर परफॉरमेंस वाले जिला अध्यक्षों को हटाया जा सकता है।
बडे़ नेता भी जिलाध्यक्ष के तौर पर कमजोर साबित हुए
पार्टी सूत्रों की मानें तो जिन जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट रिव्यू में कमजोर मिली है। उनमें सीनियर लीडर भी बतौर जिलाध्यक्ष फेल साबित हुए हैं। पूर्व मंत्री और कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (CEC) के मेंबर ओमकार सिंह मरकाम(जिलाध्यक्ष डिंडोरी) , सतना विधायक और ओबीसी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाह(जिलाध्यक्ष सतना), मंडला के पूर्व विधायक डॉ अशोक मर्सकोले(जिलाध्यक्ष मंडला) जैसे नेता भी जिलों में अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे।
इंदौर शहर अध्यक्ष को भी बदला जा सकता है
कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि पार्टी आलाकमान इंदौर के शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के निर्णयों और बयानों से संगठन नाराज है। दिग्विजय सिंह के इंदौर में एक प्रदर्शन को लेकर चिंटू चौकसे ने बयान दिया था। पार्षदों के वंदे मातरम विवाद पर पार्टी आलाकमान से चर्चा किए बिना की गई बयानबाजी के बाद अब इंदौर में शहर अध्यक्ष को बदला जा सकता है।
आठ महीने पहले हुई थी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति
पिछले साल जून 2025 में भोपाल में राहुल गांधी ने संगठन सृजन अभियान की शुरुआत की थी। करीब दो महीनों के लंबे मंथन और बैठकों के बाद जिला अध्यचों के नाम तय किए गए थे।
अब सिर्फ पद नहीं, काम जरूरी
बैठक में ब्लॉक अध्यक्षों को साफ शब्दों में संदेश दिया गया कि अब जिम्मेदारी मिलने का मतलब केवल पद संभालना नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से काम करना है। उन्हें निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मंडल, ब्लॉक, गांव और वार्ड स्तर तक संगठन का मजबूत ढांचा खड़ा करें और हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाएं। नेताओं ने यह भी कहा कि अब केवल कागजों पर कमेटियां बनाकर सूची भेजना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हर नियुक्ति और हर इकाई का फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाएगा। यदि कोई पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी से अनजान पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
परफॉर्मेंस पर टिकेगा भविष्य, समीक्षा तय
बैठक में संगठन के भीतर जवाबदेही तय करने पर विशेष जोर दिया गया। जिला अध्यक्षों के काम का मूल्यांकन पहले से जारी है। ब्लॉक अध्यक्षों के काम की भी छह महीने बाद समीक्षा की जाएगी। इससे साफ संकेत मिला कि आने वाले समय में संगठन में परफॉर्मेंस बेस्ड सिस्टम लागू होगा, जहां सक्रिय और काम करने वाले नेताओं को ही आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
जन संवाद के जरिए जनता से सीधा संपर्क बढ़ाने की रणनीति
संगठन प्रभारी संजय कामले ने कहा कि अब हर ब्लॉक स्तर पर जन संवाद कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए कि वे रोजाना लोगों से मिलें, उनकी समस्याएं सुनें और उन्हें पार्टी की विचारधारा से जोड़ें। नेताओं का मानना है कि जनता से सीधा संवाद ही संगठन को मजबूत करने का सबसे प्रभावी तरीका है और इससे पार्टी की पकड़ फिर से मजबूत होगी।
2028 चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा संगठन
पूरे सम्मेलन में यह साफ दिखा कि कांग्रेस अब 2023 की हार के बाद संगठन को दोबारा मजबूत करने में जुटी है। ब्लॉक स्तर से लेकर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत आधार तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
हर परिवार से 100 रुपए लेने का प्रस्ताव भी चर्चा में
बैठक के दौरान एक अहम प्रस्ताव यह भी सामने आया कि हर विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येक परिवार से 100 रुपए सहयोग राशि ली जाए। इस राशि को जिला और ब्लॉक स्तर पर ही खर्च किया जाएगा, ताकि संगठन को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सके और स्थानीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो सकें। नेताओं का मानना है कि इससे न केवल संसाधन जुटेंगे, बल्कि आम लोगों के साथ पार्टी का सीधा जुड़ाव भी बढ़ेगा।




