मुख्यमंत्री का गांव-गांव संवाद बना सुशासन का नया मॉडल क्या सरकार का यही जमीनी जुड़ाव अब बन रहा विपक्ष के लिए परेशानी का कारण ?

क्या सरकार का यही जमीनी जुड़ाव अब बन रहा विपक्ष के लिए परेशानी का कारण ?

छत्तीसगढ़ सुशासन तिहार के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम करने का बड़ा प्रयास शुरू किया है। मुख्यमंत्री लगातार गांवों में पहुंचकर आम लोगों से सीधे संवाद कर रहे हैं। चौपालों में बैठकर महिलाओं, किसानों, युवाओं और बुजुर्गों की समस्याएं सुन रहे हैं तथा अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री का विजन साफ है — “शासन जनता तक पहुंचे, जनता को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।” यही वजह है कि सुशासन तिहार के दौरान प्रदेशभर में जनसमस्याओं के निराकरण के साथ-साथ विकास कार्यों को नई गति मिली है। कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों का लोकार्पण, नई सौगातों की घोषणा और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार का कार्य तेजी से हो रहा है।

शायद सरकार की इसी सक्रियता और जनता से सीधे जुड़ाव ने विपक्ष की चिंता बढ़ा दी है। जनता के बीच बढ़ते सकारात्मक माहौल को देखकर अब कुछ विपक्ष के विधायक सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रमों को विवादित बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

स्थानीय लोगो का कहना है कि आज मुख्यमंत्री गांव की चौपाल में बैठकर जिस आत्मीयता से लोगों की बात सुन रहे हैं, वह पहले कभी देखने को नहीं मिला। जनता विकास और समाधान देख रही है, जबकि विपक्ष केवल आरोपों की राजनीति में उलझा हुआ दिखाई दे रहा है।

सुशासन तिहार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार अब घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर काम करने में विश्वास रखती है।

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