धान घोटाले का फूटा ‘भंडाफोड़’! 3850 बोरा गायब, चंद्रपुर के प्रभारी संस्था प्रबंधक पीताम्बर निषाद के खिलाफ एफआईआर के आदेशभौतिक सत्यापन में 3850 बोरा धान गायब, विभाग ने प्रथम दृष्टया माना जिम्मेदार; थाना चंद्रपुर में अपराध दर्ज कराने बैंक प्रबंधक को दिया गया निर्देश

चंद्रपुर :— सहकारी समिति मर्यादित चंद्रपुर में धान खरीदी से जुड़े करोड़ों की सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आई है। सहकारिता विभाग द्वारा कराए गए संयुक्त भौतिक सत्यापन में समिति के स्टॉक से कुल 3850 बोरा धान गायब पाया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत 43 लाख 67 हजार 283 रुपये आंकी गई है। मामले को गंभीर आर्थिक अनियमितता मानते हुए सहायक आयुक्त सहकारिता एवं सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला सक्ती ने पूर्व प्रभारी संस्था प्रबंधक पीताम्बर निषाद के विरुद्ध थाना चंद्रपुर में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी कर दिए हैं।
17 जुलाई 2026 को जारी आदेश में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, शाखा चंद्रपुर के शाखा प्रबंधक को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि पूर्व प्रभारी संस्था प्रबंधक के विरुद्ध तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज कराते हुए इसकी सूचना सहकारिता कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।


जांच में खुली बड़ी गड़बड़ी
विभागीय आदेश के अनुसार सहायक आयुक्त सहकारिता के निर्देश पर सहकारिता विस्तार अधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों की संयुक्त टीम ने सेवा सहकारी समिति मर्यादित चंद्रपुर का भौतिक सत्यापन किया। जांच के दौरान वर्ष 2026-27 के धान उपार्जन के बाद उपलब्ध स्टॉक का रिकॉर्ड से मिलान किया गया। इस दौरान 3377 बोरा धान कम पाया गया। जब इसमें पिछले वर्ष का 473 बोरा शेष स्टॉक जोड़ा गया तो कुल 3850 बोरा धान की कमी सामने आई। जांच प्रतिवेदन में इस कमी की अनुमानित राशि 43,67,283 रुपये बताई गई है, जिसे गंभीर आर्थिक अनियमितता माना गया है।
प्रथम दृष्टया जिम्मेदार ठहराए गए पीताम्बर निषाद
विभागीय जांच प्रतिवेदन के आधार पर सहकारिता विभाग ने प्रथम दृष्टया इस पूरे मामले के लिए तत्कालीन प्रभारी संस्था प्रबंधक पीताम्बर निषाद को जिम्मेदार माना है। इसी आधार पर उनके विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए एफआईआर दर्ज कराने का आदेश जारी किया गया है।
अब पुलिस जांच पर टिकी निगाहें
विभागीय आदेश जारी होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 3850 बोरा धान आखिर गया कहां? सरकारी धान के इस भारी अंतर के पीछे लापरवाही, गबन या किसी संगठित अनियमितता की भूमिका रही, इसका खुलासा अब पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।
यदि थाना चंद्रपुर में एफआईआर दर्ज होती है, तो मामला केवल विभागीय जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति से जुड़ी आपराधिक जांच का रूप ले लेगा। ऐसे में पूरे मामले में आगे होने वाली कार्रवाई पर किसानों, सहकारी समिति के सदस्यों और प्रशासन की नजरें टिकी हुई हैं।




