मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश के पूर्वी जिले सूखे की मार झेल रहे, 16% बारिश की कमी; महीने के आखिर में बनेगा स्ट्रॉन्ग सिस्टम

भोपाल
 मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय तो है, लेकिन तेज बारिश का दौर अभी भी नहीं लौट पाया है। पिछले 12 दिनों से प्रदेश में कहीं भी व्यापक और भारी बारिश नहीं हुई, जिसका असर अब मानसून के आंकड़ों पर साफ दिखाई देने लगा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, प्रदेश में अब तक सामान्य से 16 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

हालांकि राहत की बात यह है कि अगले चार दिन (20 से 23 जुलाई) तक प्रदेश के करीब 90 प्रतिशत हिस्से में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। इस दौरान रोजाना 3 से 5 जिलों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

प्रदेश में अब तक कितनी बारिश हुई?
मौसम विभाग के अनुसार, इस मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में अब तक 261.4 मिमी (10.3 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 311.8 मिमी (12.3 इंच) होनी चाहिए थी।

IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के अनुसार, जुलाई में पिछले 12 दिन से भारी बारिश नहीं हुई है। इसका सीधा असर बारिश के ओवरऑल आंकड़े पर हो रहा है। अब प्रदेश में 16 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

प्रदेश में अब तक 261.4 मिमी (10.3) बारिश हो चुकी है, जो सामान्य बारिश के 311.8 मिमी (12.3) से 16% कम है। दूसरी ओर, पूर्वी हिस्से के जिलों में 23 प्रतिशत पानी कम गिरा है। वहीं, पश्चिमी हिस्से में भी 10% कम बारिश दर्ज की गई है।

आज इन जिलों में अलर्ट दमोह, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में गरज-चमक, आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन और आगर-मालवा में बादल छाए रहेंगे, लेकिन यहां बारिश होने का अलर्ट नहीं है।

इन जिलों की अच्छी-बुरी स्थिति
कम बारिश वाले 39 जिले- अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, दतिया, धार, गुना, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी और विदिशा।

ज्यादा बारिश वाले 16 जिले- निवाड़ी, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, सीहोर और उज्जैन।

किन जिलों में बारिश की सबसे ज्यादा कमी?

मौसम विभाग के अनुसार 39 जिले अभी भी सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में हैं। इनमें प्रमुख जिले हैं-

अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, धार, गुना, झाबुआ, मुरैना, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, शिवपुरी, विदिशा सहित कुल 39 जिले।

किन जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश?

प्रदेश के 16 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें शामिल हैं-

भोपाल, इंदौर, सीहोर, देवास, हरदा, ग्वालियर, राजगढ़, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, उज्जैन, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड और निवाड़ी।
मौसम विभाग ने क्यों जताई बारिश की उम्मीद?

मौसम वैज्ञानिक के अनुसार प्रदेश में कई मौसम प्रणालियां एक साथ सक्रिय हैं।

    मानसून ट्रफ उत्तर-पश्चिम भारत से बंगाल की खाड़ी तक सक्रिय है।
    झारखंड-बिहार के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवात बना हुआ है।
    दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश-दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर भी चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है।
    बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मध्य भारत की ओर पहुंच रही है।

इन्हीं वजहों से पूर्वी मध्य प्रदेश में लगातार बादल बन रहे हैं। यदि मौसम तंत्र पश्चिम की ओर खिसकता है तो पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी अच्छी बारिश होने की संभावना बढ़ जाएगी।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button