खाकी की आड़ में नगर सैनिक की गुंडागर्दी: एसपी के नाम की धौंस दिखाकर पत्रकार से की बदतमीजी, एडिशनल एसपी के हस्तक्षेप के बाद झुकाबड़ा सवाल: क्या एक नगर सैनिक को मिल गई है पत्रकारों से अभद्रता की खुली छूट? यातायात विभाग में ही बार-बार तैनाती के पीछे क्या है ‘खास मेहरबानी’?

विशेष संवाददाता / ब्यूरो रिपोर्ट
जांजगीर-चांपा:
जिले में कानून व्यवस्था और यातायात संभालने के नाम पर तैनात कुछ मातहत कर्मचारी पूरे पुलिस प्रशासन की छवि पर कालिख पोतने पर आमादा हैं। ताजा मामला यातायात शाखा में पदस्थ नगर सैनिक सुरेश साहू की मनमानी और सरेआम बदतमीजी का सामने आया है। नगर सैनिक ने न केवल एक पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार किया, बल्कि जिले के पुलिस कप्तान (एसपी) के नाम की फर्जी धौंस जमाकर अपनी मनमानी करने की कोशिश की। पूरा मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
नाश्ता लेकर जा रहे पत्रकार को रोका, एसपी के नाम का बनाया ढाल
घटनाक्रम के अनुसार, एक पत्रकार साथी अपने अन्य पत्रकार साथियों के लिए नाश्ता लेकर जा रहे थे। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात नगर सैनिक सुरेश साहू ने दबंगई दिखाते हुए वाहन को रोक लिया। जब पत्रकार ने शालीनता से अंदर जाने का कारण बताया, तो नगर सैनिक बदतमीजी पर उतर आया।
अपनी वर्दी और पद की मर्यादा भूलकर उसने रौब झाड़ते हुए कहा:
“एसपी साहब ने अंदर जाने से मना किया है। पहले एसपी साहब से बात करो, तभी जाने दूंगा।”
एडिशनल एसपी (ट्रैफिक) के दखल के बाद ढीली पड़ी हेकड़ी
जब नगर सैनिक की बदजुबानी और तानाशाही हद से पार होने लगी, तब पत्रकार ने तत्काल एडिशनल एसपी (ट्रैफिक) से संपर्क साधा और फोन पर नगर सैनिक की बात कराई। उच्चाधिकारी का निर्देश मिलते ही नगर सैनिक के सुर बदल गए और उसने आनन-फानन में गाड़ी को आगे जाने दिया।
लेकिन सवाल यह उठता है कि एडिशनल एसपी से बात होने से पहले तक जिस तरह का अशोभनीय व्यवहार और अभद्रता पत्रकार के साथ की गई, उसकी जवाबदेही किसकी है?
प्रशासन और विभाग के सामने खड़े होते गंभीर सवाल:
- एसपी के नाम का दुरुपयोग क्यों?: क्या जिले के पुलिस अधीक्षक ने किसी नगर सैनिक को यह अधिकार दिया है कि वह उनके नाम का गलत इस्तेमाल कर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ से बदतमीजी करे?
- एक कर्मचारी के कारण पूरा विभाग बदनाम: पुलिस और जनता के बीच बेहतर तालमेल बनाने के उच्चाधिकारियों के प्रयासों पर ऐसे बेलगाम नगर सैनिक पानी फेर रहे हैं।
- यातायात में ही बार-बार पोस्टिंग का रहस्य क्या?: नगर सैनिक सुरेश साहू की बार-बार यातायात शाखा में ही तैनाती क्यों की जाती है? क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का इस पर कोई विशेष वरदहस्त है?
- क्या होगी दंडात्मक कार्रवाई?: वर्दी का रौब दिखाकर मीडियाकर्मियों से उलझने और पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा करने वाले इस नगर सैनिक पर क्या उच्चाधिकारी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे या मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश
इस घटना के बाद जिले के पत्रकारों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मीडियाकर्मियों का स्पष्ट कहना है कि यदि एसपी के नाम की आड़ में पत्रकारों को प्रताड़ित करने और बदतमीजी करने वाले ऐसे कर्मचारियों पर नकेल नहीं कसी गई, तो वे मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराएंगे।



