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नैनी की फैक्ट्री से अमेरिका पहुंचा 175 MVA ट्रांसफॉर्मर, प्रयागराज की बड़ी उपलब्धि

 प्रयागराज
यूपी में प्रयागराज के नैनी से पहली बार अमेरिका के लिए पावर ट्रांसफॉर्मर भेजा गया है। शिरडी साईं इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (एसएसईएल) के नैनी स्थित विनिर्माण संयंत्र में तैयार 175 एमवीए, 345 केवी क्षमता का ईएचवी पावर ट्रांसफॉर्मर अमेरिका के लिए रवाना किया गया। कंपनी के मुताबिक यह नैनी संयंत्र से अमेरिका को भेजा गया पहला ईएचवी पावर ट्रांसफॉर्मर है। इसे कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया है। अगले 12-18 महीने में 500-600 करोड़ के निर्यात का लक्ष्य भी तय किया गया है।

कंपनी मैनेजर अरुण यादव ने बताया कि अमेरिका को पहली सप्लाई के साथ कंपनी ने उच्च क्षमता वाले ईएचवी पावर ट्रांसफॉर्मरों के वैश्विक बाजार में अपनी क्षमता का विस्तार किया है। एसएसईएल के सीईओ शरत चंद्र कोल्ला ने कहा कि अमेरिका को पहले ईएचवी ट्रांसफॉर्मर की सफल सप्लाई कंपनी की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बिजली पारेषण उपकरण निर्माता बनने की यात्रा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। अमेरिका को भेजा गया यह ट्रांसफार्मर अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता, इंजीनियरिंग और प्रदर्शन संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

एसएसईएल के अध्यक्ष सुधीर वेन्त्रम ने कहा कि नैनी से अमेरिका के लिए पहले 175 एमवीए, 345 केवी क्लास ट्रांसफॉर्मर की रवानगी कंपनी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। ईस्टर्न यूपी चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष विनय टंडन ने इस उपलब्धि पर बधाई दी और कहा कि प्रयागराज के उद्यमी बहुत कुछ कर सकते हैं। सरकार जो सहयोग देने की बात करती है, बशर्ते उसे धरातल पर लागू करें। प्रयागराज से लगभग 600 करोड़ रुपये के ट्रांसफार्मर भेजे जाएंगे। कंपनी यूरोप में पावर और डिस्ट्रीब्यूशन दोनों श्रेणियों के ट्रांसफार्मरों के लिए स्वीकृति हासिल करने की दिशा में भी काम कर रही है।

सात दशक में बदली कंपनी, कायम रहा प्रयागराज का औद्योगिक रिश्ता
1954 में जीईसी से शुरू हुई यह यात्रा 2026 तक आते-आते कई स्वामियों और नामों से गुजर चुकी है। जीईसी से अरेवा, अरेवा से अल्स्टॉम, अल्स्टॉम से जीई और फिर जीई से शिरडी साईं इलेक्ट्रिकल्स तक पहुंची यह इकाई एक समय बंदी के दौर में भी गई। लेकिन 2022 में दोबारा उत्पादन शुरू होने के बाद अब वही संयंत्र अमेरिका के लिए पावर ट्रांसफॉर्मर तैयार कर रहा है। इस लिहाज से 1954 से 2026 तक का यह सफर प्रयागराज के औद्योगिक क्षेत्र में बदलाव, संकट और पुनर्जीवन की एक लंबी कहानी है।

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