यूपी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की तीन पहलों का केंद्र सरकार के अतिरिक्त सचिव ने किया निरीक्षण

बहराइच में सौर ऊर्जा से सिंचाई, मिर्जापुर में महिलाओं के किसान उत्पादक संगठन और गोरखपुर में बायोफ्लॉक मत्स्य पालन मॉडल को मिली राष्ट्रीय स्तर पर पहचान
केंद्र सरकार की टीम ने किया स्थलीय सत्यापन, यूपी के सफल मॉडल बने दूसरे राज्यों के लिए प्रेरणास्रोत
लखनऊ
योगी सरकार में सामुदायिक सौर ऊर्जा आधारित आजीविका मॉडल को बढ़ावा मिल रहा है। ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की तीन नई पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय द्वारा देशभर से चुनी गई 27 सर्वश्रेष्ठ प्रशासनिक पहलों में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के तीन मॉडल शामिल किए गए हैं। इनमें बहराइच का सौर ऊर्जा आधारित आजीविका मॉडल, मिर्जापुर का महिला किसान उत्पादक संगठन और गोरखपुर का बायोफ्लॉक मत्स्य पालन मॉडल शामिल है। इनकी सफलता और कार्यप्रणाली को समझने के लिए केंद्र सरकार की टीम ने तीनों जिलों का दौरा कर स्थलीय सत्यापन किया।
अतिरिक्त सचिव ने ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सामुदायिक सौर ऊर्जा आधारित आजीविका और महिला नेतृत्व वाले किसान उत्पादक संगठन को ऐसे उदाहरण बताया, जिनसे दूसरे राज्य भी सीख सकते हैं। केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय ने सभी राज्यों से बेहतर प्रशासनिक कार्यों और नई पहलों की जानकारी मांगी थी। इनमें से 27 पहलों का चयन किया गया। इनके सत्यापन के लिए नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस (एनसीजीजी) के सहयोग से अधिकारियों की टीमें संबंधित राज्यों में भेजी गईं। इसी क्रम में कैबिनेट सचिवालय के अतिरिक्त सचिव सौरभ कुमार तिवारी ने उत्तर प्रदेश के तीन जिलों का भ्रमण किया।
बहराइच में सौर ऊर्जा से 100 एकड़ खेतों की सिंचाई
केंद्रीय टीम ने 14 अक्टूबर को बहराइच के मिहिनपुरवा विकासखंड की घूमना भारू ग्राम पंचायत का दौरा किया। यहां ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (टीआरआई) के सहयोग से 43 किलोवाट पीक क्षमता का सामुदायिक सोलर माइक्रोग्रिड स्थापित किया गया है। इस परियोजना के माध्यम से करीब 200 परिवारों की 100 एकड़ कृषि भूमि में 10 सौर पंपों से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा ग्राम विद्युत समिति ई-रिक्शा, ई-स्कूटी और मोबाइल चार्जिंग जैसी सेवाएं भी संचालित कर रही है। इससे ग्रामीणों को स्वच्छ ऊर्जा के साथ रोजगार और आजीविका के नए अवसर मिल रहे हैं।
मिर्जापुर में 1,221 महिलाएं चला रहीं किसान उत्पादक संगठन
केंद्रीय टीम ने 19 अक्टूबर को मिर्जापुर के छानबे विकासखंड में छनवर एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का निरीक्षण किया। वर्ष 2022-23 में स्थापित इस किसान उत्पादक संगठन का संचालन पूरी तरह महिलाओं के हाथों में है। वर्तमान में इससे 1,221 महिला शेयरधारक जुड़ी हैं।
संगठन की महिलाएं कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री, जैविक खाद उत्पादन, कृषि उपकरण उपलब्ध कराने और उत्पादों के विपणन सहित कई गतिविधियां संचालित कर रही हैं। महिलाओं ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने सामूहिक प्रयास से 25 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति सफलतापूर्वक पूरी की है।
वर्तमान में संगठन लगभग 10.50 लाख रुपये का व्यावसायिक मार्जिन अर्जित कर रहा है, जो इसके वार्षिक संचालन खर्च से अधिक है। संगठन का लक्ष्य सभी महिला सदस्यों की आय बढ़ाकर उन्हें लखपति दीदी बनाना है।
इस दौरान केंद्रीय टीम ने विंध्य मार्ट का भी निरीक्षण किया। यहां स्वयं सहायता समूहों के स्थानीय उत्पादों के विपणन और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों की जानकारी ली गई। अधिकारियों ने वन प्रिया योजना, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई और जलवायु के अनुकूल ग्रामीण विकास की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
गोरखपुर में आधुनिक तकनीक से मछली पालन कर रहीं महिलाएं
केंद्रीय टीम ने 26 अक्टूबर को गोरखपुर के खजनी विकासखंड की छताही ग्राम पंचायत का दौरा किया। यहां जल परी प्रेरणा महिला मत्स्य उत्पादक समूह द्वारा बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन किया जा रहा है।
ग्राम पंचायत में पांच बायोफ्लॉक इकाइयां स्थापित की गई हैं। इन इकाइयों के माध्यम से स्वयं सहायता समूह की महिलाएं वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन कर रही हैं। बायोफ्लॉक तकनीक में सीमित स्थान और नियंत्रित जल व्यवस्था में मछली पालन किया जा सकता है। समूह की महिलाओं ने अधिकारियों को अपने कामकाज की जानकारी दी। साथ ही भविष्य में बायोफ्लॉक इकाइयों की संख्या बढ़ाने की योजना भी साझा की।
दूसरे राज्य भी ले सकते हैं यूपी के मॉडल से प्रेरणा
तीनों जिलों के भ्रमण के बाद कैबिनेट सचिवालय के अतिरिक्त सचिव सौरभ कुमार तिवारी ने उत्तर प्रदेश के सफल मॉडल की प्रशंसा की। इसमें विशेष रूप से बहराइच के सामुदायिक सौर माइक्रोग्रिड मॉडल को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में लागू करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। अतिरिक्त सचिव ने ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सामुदायिक सौर ऊर्जा आधारित आजीविका और महिला नेतृत्व वाले किसान उत्पादक संगठन को ऐसे उदाहरण बताया, जिनसे दूसरे राज्य भी सीख सकते हैं। इन तीनों पहलों को आगे बढ़ाने में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिला प्रशासन, ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया, सहयोगी संस्थाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन मॉडलों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने, महिलाओं की आय बढ़ाने और स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने पर जोर दिया जा रहा है।




