मध्य प्रदेश

₹41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद फिर चर्चा में, सिंधिया परिवार के समझौते को धोखाधड़ी बताने वाले आरोपों की होगी जांच

ग्वालियर

सिंधिया राज परिवार की 41 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति से तैयार हुआ समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) हर सुनवाई के साथ कानूनी अड़चनों में फंसता गया है।

अतिरिक्त सत्र न्यायालय (ADJ) में गुरुवार (29 अक्टूबर 2026) को फिर सुनवाई है।

आज समझौते प्रस्ताव पर आपत्ति लगाने वाली ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पदमाराजे की सुपुत्री प्रतिमा राणा के बयान दर्ज होंगे।

प्रतिमा देवी ने आरोप लगाया था कि समझौता प्रस्ताव में सहमति पर हस्ताक्षण धोखाधड़ी है। इसी आरोप के बाद केस में हलचल तेज हो गई थी।

अब प्रतिमा के आवेदन को स्वीकार कर कोर्ट ने उन्हें अपना पक्ष स्पष्ट करने का मौका दिया है। प्रतिमा देवी के गुरुवार को बयान होंगे और उनको अपनी बात को सबित करने के लिए साक्ष्य भी पेश करने होंगे। इससे पहले 14 अक्टूबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने साक्ष्य कराने की बात पर सहमति देते हुए केस को आगे बढ़ाया था।

एक दूसरे पर लगा चुके हैं धोखाधड़ी का आरोप
इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद के समझौते पर सात दिन पहले हुई सुनवाई में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना के समझौता आपत्ति आवेदन पर बहस हुई थी।

प्रतिमा देवी की ओर से कहा गया है कि उनसे धोखाधड़ी कर समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। मतलब साफ तौर पर प्रतिमा देवी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया, वंसुधरा राजे, यशोधरा राजे व ऊषा राजे पर धोखाधड़ी से हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया था।

सहमति से हस्ताक्षर की बात
प्रतिमा देवी द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति का जवाब प्रतिमा राणा की तीनों मौसियों (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, एमपी की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे) ने न्यायालय में दिया है।

उनका कहना है कि स​हमति से हस्ताक्षर हुए हैं। हस्ताक्षर के बाद सभी वहां रुके फिर फैमिली डिनर हुआ और आखिर में फोटोग्राफ्स भी लिए गए।

सहमति से हुआ समझौता?
दरअसल संपत्ति विवाद में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे, ऊषा राजे और प्रतिमा देवी के बीच समझौता हुआ था. अन्य पक्षों ने कहा था कि समझौता सहमति से हुआ था लेकिन प्रतिमा देवी ने समझौते को धोखाधड़ी बताया। 

सिंधिया राजघराने में कब शुरू हुआ संपत्ति विवाद?
बताया जाता है कि सिंधिया राजघराने में संपत्ति विवाद की शुरुआत 80 के दशक में शुरू हुई थी, जब एक तरफ राजमाता विजयाराजे सिंधिया थीं और दूसरी तरफ उनके इकलौते बेटे माधवराव सिंधिया. बाद में जब माधवराव कांग्रेस में चले गए, तो राजमाता ने एक वसीयत बनाई, जिसमें उन्होंने अपने बेटे को अपनी निजी संपत्ति और कई प्रमुख अधिकारों से बेदखल कर दिया. उन्होंने अपनी संपत्तियों को ट्रस्टों में बदला और बेटियों को अहम हिस्सेदार बनाया. माधवराव की मौत के बाद कानूनी लड़ाई की जिम्मेदारी उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संभाली, तो राजामाता की तरफ से उनकी बेटियां मैदान में आ गईं. इसी तरह से ज्योतिरादित्य सिंधिया अब संपत्ति के लिए अपनी बुआओं से ही जंग कर रहे हैं. उनकी कुल चार बुआ हैं- पद्मावती राजे, ऊषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे. प्रतिमा देवी पद्मावती राजे की बेटी हैं। 

पहले एकपक्षीय घोषित, अब समझौते पर आपत्ति

पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ सिविल वाद दायर किया था। लंबे समय तक चले विवाद के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से राजीनामा तैयार कर अदालत में पेश किया। हालांकि, इस समझौते पर अब आपत्तियां सामने आने लगी हैं।

मूल वाद में दिवंगत पद्मावती राजे की बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा राना को भी पक्षकार बनाया गया था। सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं होने पर अदालत ने उन्हें एकपक्षीय घोषित कर दिया था। अब प्रतिमा ने दोबारा कार्यवाही में शामिल होने और संपत्ति में अपना हक सुनिश्चित करने के लिए आवेदन दिया है।
बेटियों की हिस्सेदारी पर भी सवाल

पद्मावती राजे की संपत्ति में हिस्सेदारी के आधार पर उनकी बेटियों के अधिकार का मुद्दा भी विवाद का अहम पहलू बन गया है। प्रतिमा की आपत्ति और उनके साक्ष्यों के बाद अदालत में पेश राजीनामे की वैधानिकता पर आगे की कार्यवाही की दिशा तय हो सकती है। गुरुवार को होने वाले बयान इस मामले में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

 

पहले घोषित हुई थीं 'एक्स पार्टी', अब पूरा समझौता इन पर ही टिका
वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा पाने के लिए सिविल सूट दायर किया था। लंबे कानूनी विवाद के बाद हाल ही में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक राजीनामा तैयार कर कोर्ट में पेश किया था।

मूल दावे में दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की दोनों बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार तो बनाया गया था, लेकिन पूर्व में सुनवाई के दौरान उपस्थित न होने के कारण अदालत ने उन्हें 'एक्स पार्टी' (एकपक्षीय) घोषित कर दिया था।

प्रतिमा ने लगाया आवेदन

अब प्रतिमा देवी ने कोर्ट में आवेदन देकर प्रक्रिया में दोबारा शामिल होने और समझौते में अपना हक पाने की गुहार लगाई है। साथ ही वर्तमान समझौते प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं, इसलिए उनकी बेटियों को छोड़े जाने से यह राजीनामा कानूनी रूप से पेचीदा हो गया है।

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