जांजगीर-चांपा में नियमों की अनदेखी: बिना लाइसेंस चल रही पटाखों की दुकानें, बार-बार के हादसों के बाद भी स्थानी प्रशासन ‘लापरवास्थानीह

जांजगीर-चांपा। दीपावली पर्व से पहले जांजगीर-चांपा जिले में पटाखों का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। जिले के मुख्यालय जांजगीर और नैला समेत अन्य शहरों में बड़ी संख्या में दुकानें बिना किसी लाइसेंस के संचालित हो रही हैं, वहीं लाइसेंसी दुकानें भी सुरक्षा मानकों को ताक पर रख रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में अवैध भंडारण और बिक्री की खबरें सामने आने के बावजूद, पुलिस और जिला प्रशासन ठोस कार्रवाई करने में अक्षम दिखाई दे रहा है।
खतरे की घंटी: नियम विरुद्ध दुकानें और दूरी का उल्लंघन
विस्फोटक अधिनियम के तहत पटाखों की अस्थायी दुकानों के लिए कड़े सुरक्षा नियम निर्धारित हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक दुकान के बीच कम से कम 5-5 फीट की सुरक्षित दूरी होनी चाहिए ताकि आगजनी की स्थिति में आग फैलने से रोका जा सके।
हालांकि, मौके पर यह देखा गया है कि अधिकतर दुकानें एक-दूसरे से सटाकर लगाई गई हैं। यह स्थिति जांजगीर-चांपा जिले में पहली बार इतनी व्यापक स्तर पर देखने को मिली है, जहां प्रशासन की नाक के नीचे नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है।
हादसों से भी सबक नहीं: लापरवाही के कारण
जिले में नियमों के उल्लंघन को पुलिस-प्रशासन की ‘लापरवाही’ के रूप में देखा जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण पिछले वर्षों की घटनाएं हैं:

  • हाई स्कूल पटाखा मैदान में आगजनी: पिछले दो वर्षों में हाई स्कूल पटाखा मैदान में आगजनी की लगातार दो बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे लाखों का माल जलकर खाक हो गया था।
  • घनी आबादी में अवैध भंडारण: बार-बार यह बात सामने आई है कि थोक और चिल्हर व्यापारी घनी आबादी के बीच स्थित मकानों और छोटे गोदामों में पटाखों का भंडारण कर रहे हैं, जो शहर को “बारूद के ढेर” पर रखने जैसा है।
    पुलिस-प्रशासन पर गंभीर सवाल
    क्षेत्रीय नागरिकों और अन्य पटाखा विक्रेताओं का स्पष्ट आरोप है कि पुलिस और प्रशासन की ओर से बड़े व्यापारियों और अवैध कारोबारियों पर न तो सख्त निगरानी रखी जा रही है और न ही आवश्यक जांच की जा रही है। हाल की कुछ कार्रवाईयां केवल छोटे विक्रेताओं तक ही सीमित रही हैं, जबकि थोक कारोबारियों के बड़े गोदामों तक प्रशासन की टीम पहुंच नहीं पा रही है।
    जिला प्रशासन को लाइसेंस जारी करने से पहले सुरक्षा शर्तों की जांच करनी होती है, जिसमें अग्निशमन उपकरण की उपलब्धता और सुरक्षित दूरी सुनिश्चित करना शामिल है। लेकिन मौजूदा स्थिति प्रशासन की लचर व्यवस्था को साफ तौर पर दर्शाती है।
    निष्कर्ष
    जांजगीर-चांपा जिला बार-बार की आगजनी की घटनाओं के बाद भी गंभीर जोखिम में है। बिना लाइसेंस की दुकानों का संचालन और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकता है। पुलिस और प्रशासन को तत्काल प्रभाव से इस लापरवाही पर विराम लगाते हुए, अवैध दुकानों को सील करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले लाइसेंसी विक्रेताओं पर कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। जन सुरक्षा से जुड़े इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई घातक सिद्ध हो सकती है।

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